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झारखंड के जननायक शिबू सोरेन: एक प्रेरणादायक जीवन गाथा (1944 – 2025)

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परिचय

शिबू सोरेन, जिन्हें पूरे झारखंड में सम्मानपूर्वक “गुरुजी” कहा जाता है, भारतीय राजनीति के उन चुनिंदा नेताओं में से एक हैं जिन्होंने अपना पूरा जीवन आदिवासी समाज के हक, अधिकार और पहचान के लिए समर्पित किया। वे झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के संस्थापक और झारखंड राज्य आंदोलन के प्रमुख नेता रहे हैं।

प्रारंभिक जीवन और संघर्ष

शिबू सोरेन का जन्म 11 जनवरी 1944 को नेमरा गाँव, रामगढ़ जिला (तत्कालीन बिहार, अब झारखंड) में एक संथाल आदिवासी परिवार में हुआ। उनके पिता सोबरा सोरेन एक किसान थे, जिन्हें स्थानीय जमींदारों ने मार डाला था। इस घटना ने शिबू को बचपन में ही अन्याय के खिलाफ खड़ा होने की प्रेरणा दी।

उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा गांव में प्राप्त की और फिर रांची के जटरा हाई स्कूल से आगे की पढ़ाई की। हालांकि पारिवारिक और आर्थिक कारणों से उनकी शिक्षा अधूरी रह गई, लेकिन उन्होंने सामाजिक कार्यों और आंदोलनों में खुद को पूरी तरह समर्पित कर दिया।

सामाजिक आंदोलन और JMM की स्थापना

1970 के दशक में शिबू सोरेन ने संथाल हुड़ार आंदोलन चलाया, जिसमें उन्होंने जमींदारों और साहूकारों से आदिवासी जमीनों को वापस दिलाने का प्रयास किया। उन्होंने अपने गांव से शुरू कर के झारखंड के कई हिस्सों में आदिवासियों को संगठित किया।

1972 में उन्होंने झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की स्थापना की। इसका उद्देश्य था बिहार से अलग होकर एक आदिवासी बहुल राज्य – झारखंड – का निर्माण करना। इस आंदोलन को उन्होंने जनआंदोलन का रूप दिया और वर्षों की मेहनत के बाद 15 नवंबर 2000 को झारखंड को एक अलग राज्य का दर्जा मिला।

राजनीतिक सफर

शिबू सोरेन ने 1980 में पहली बार लोकसभा चुनाव जीता और दुमका से संसद पहुंचे। इसके बाद वे 1989, 1991, 1996, 2002 और 2004 में भी सांसद चुने गए। वे केंद्र सरकार में कोयला मंत्री भी बने और झारखंड की राजनीति में अहम भूमिका निभाई।

वे तीन बार झारखंड के मुख्यमंत्री भी बने:

  • पहली बार मार्च 2005 में (10 दिन)
  • दूसरी बार अगस्त 2008 से जनवरी 2009 तक
  • तीसरी बार दिसंबर 2009 से मई 2010 तक

हालांकि सभी कार्यकाल राजनीतिक अस्थिरता के चलते छोटे रहे, लेकिन जनता के बीच उनकी पकड़ मजबूत बनी रही।

विवाद और कानूनी मामले

1994 में उनके सचिव शशिनाथ झा की हत्या के आरोप में शिबू सोरेन को गिरफ्तार किया गया और 2006 में सीबीआई कोर्ट ने उन्हें दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। लेकिन 2007 में दिल्ली हाईकोर्ट ने उन्हें सबूतों के अभाव में बरी कर दिया

पारिवारिक जीवन

शिबू सोरेन की पत्नी का नाम रूपी सोरेन है। उनके बेटे हेमंत सोरेन भी झारखंड के मुख्यमंत्री रह चुके हैं और वर्तमान में JMM के कार्यकारी अध्यक्ष हैं।

योगदान और विरासत

शिबू सोरेन ने झारखंड को एक पहचान दिलाई। उन्होंने आदिवासी समाज की आवाज को संसद तक पहुंचाया। वे जमीन, जंगल, जल और अधिकार की राजनीति के प्रतीक हैं। उनका संघर्ष झारखंड के हर आदिवासी के दिल में बसा है।

आज भी उन्हें “गुरुजी” के नाम से श्रद्धा से याद किया जाता है। उनका जीवन संघर्ष, नेतृत्व और समर्पण की मिसाल है।

श्रद्धांजलि: झारखंड के जननायक शिबू सोरेन का निधन – आदिवासी समाज ने अपना सच्चा प्रहरी खो दिया

झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री, झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक और आदिवासी आंदोलन के महानायक श्री शिबू सोरेन जी का निधन भारतीय राजनीति और आदिवासी समाज के लिए एक अपूरणीय क्षति है। उन्होंने जीवन भर आदिवासियों के अधिकार, पहचान और स्वाभिमान के लिए संघर्ष किया। उनके निधन से एक युग का अंत हो गया है। झारखंड ने अपना “गुरुजी”, आदिवासी समाज ने अपना नेता, और भारत ने अपना एक सच्चा सिपाही खो दिया है।
उनकी आत्मा को शांति मिले।
ईश्वर परिवार और अनुयायियों को इस अपार दुःख को सहने की शक्ति दे।

🙏 ओम् शांति 🙏

 

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