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झारखंड

हजारीबाग मुहर्रम जुलूस हादसा: 15 लोग झुलसे, 7 की हालत नाजुक – क्या रही असली वजह?

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7 जुलाई 2025, हजारीबाग (झारखंड) – मुहर्रम का महीना पूरे देश में मातम और आस्था के साथ मनाया जाता है, लेकिन झारखंड के हजारीबाग ज़िले के तुरांव पौटा गांव में इस साल का जुलूस एक भीषण हादसे का गवाह बन गया। जुलूस के दौरान हुए आग के करतब (fire stunt) में अचानक आग भड़क उठी, जिससे 15 लोग झुलस गए और उनमें से 7 की हालत बेहद गंभीर बताई जा रही है।


क्या हुआ हादसे के दिन?

6 जुलाई की रात को तुरांव पौटा गांव में पारंपरिक तौर पर मुहर्रम का जुलूस निकाला जा रहा था। इस दौरान युवाओं द्वारा मशाल और डीजल की मदद से आग के करतब दिखाए जा रहे थे। अचानक एक डीजल से भरा डिब्बा ज़मीन पर गिर गया, और जैसे ही उसमें आग लगी, एक जबरदस्त विस्फोट के साथ आग चारों ओर फैल गई।

जुलूस में महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग बड़ी संख्या में मौजूद थे, जिस वजह से भगदड़ की स्थिति बन गई और कई लोग आग की चपेट में आ गए।


कितने लोग झुलसे और उनकी हालत क्या है?

  • 15 लोग झुलसे, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं।
  • 7 लोगों को रांची के RIMS (राजेन्द्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज) रेफर किया गया है, क्योंकि उनकी हालत नाजुक बनी हुई है।
  • बाकी 8 लोगों को शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज, हजारीबाग में भर्ती कराया गया था, जहां प्राथमिक उपचार के बाद 6 को छुट्टी दे दी गई है।

इलाज और राहत कार्य

घटना के बाद प्रशासन ने तुरंत एंबुलेंस, दमकल और पुलिस टीम को मौके पर भेजा। घायलों को तत्काल हॉस्पिटल पहुंचाया गया और इलाज का पूरा खर्च सरकार द्वारा वहन किया जा रहा है

झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री ने बयान जारी करते हुए कहा:

“पीड़ितों का इलाज सर्वोच्च प्राथमिकता पर है, और जिला प्रशासन को घटना की जांच के निर्देश दे दिए गए हैं। इस प्रकार के खतरनाक करतबों पर सख्त प्रतिबंध लगाया जाएगा।”


क्या थी प्रशासन की चूक?

बड़ी बात यह है कि जिला प्रशासन ने पहले से ही “आग के साथ किसी भी तरह के करतब पर पाबंदी” का आदेश जारी किया था। फिर भी आयोजकों द्वारा इसका उल्लंघन किया गया। ऐसे कार्यक्रमों में बिना अनुमति और सुरक्षा उपायों के खतरनाक प्रदर्शन एक गंभीर लापरवाही की ओर इशारा करते हैं।

अब सवाल उठता है — क्या यह सिर्फ आयोजकों की गलती थी या प्रशासन की निगरानी में भी कमी रही?


स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया

स्थानीय निवासी शकील अंसारी ने बताया:

“हर साल हम मुहर्रम पर ऐसे करतब देखते हैं, लेकिन इस बार आग बहुत तेज़ी से फैल गई। बच्चे और महिलाएं कुछ समझ पाते, तब तक बहुत देर हो चुकी थी।”

एक घायल की बहन ने बताया कि उसका भाई केवल देखने गया था, लेकिन आग की चपेट में आ गया।


🛑 ऐसे हादसों से क्या सबक मिलते हैं?

  • 🔹 धार्मिक आयोजनों में सुरक्षा सर्वोपरि होनी चाहिए।
  • 🔹 आग, पेट्रोल या डीजल जैसे खतरनाक तत्वों का इस्तेमाल प्रतिबंधित किया जाना चाहिए।
  • 🔹 प्रशासन को केवल निर्देश जारी नहीं, बल्कि कड़ाई से निगरानी करनी चाहिए।
  • 🔹 स्थानीय युवाओं को जागरूक करने के लिए अभियान चलाना चाहिए।

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