चौपारण में अवैध अफीम खेती
हजारीबाग: झारखंड के हजारीबाग जिले के चौपारण थाना क्षेत्र में पुलिस और वन विभाग की संयुक्त टीम ने अवैध अफीम की खेती के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। दैहर पंचायत के पत्थलगड़ा और करगा जंगल क्षेत्र में चल रहे अभियान के दौरान करीब दो एकड़ में लगी अवैध अफीम की फसल को नष्ट कर दिया गया। इस कार्रवाई से इलाके में अवैध मादक पदार्थों की खेती करने वालों में हड़कंप मच गया है।
जंगल क्षेत्र में चलाया गया विशेष अभियान
प्रशासन को गुप्त सूचना मिली थी कि चौपारण थाना क्षेत्र के जंगल इलाकों में बड़े पैमाने पर अफीम की खेती की जा रही है। सूचना के आधार पर पुलिस और वन विभाग की संयुक्त टीम ने छापेमारी अभियान चलाया। टीम जब दैहर पंचायत के पत्थलगड़ा और करगा जंगल क्षेत्र पहुंची, तो वहां बड़े क्षेत्रफल में अफीम की खेती पाई गई।
अधिकारियों ने मौके पर ही लगभग दो एकड़ में फैली अफीम की फसल को नष्ट कर दिया। इस दौरान खेतों में इस्तेमाल किए जा रहे उपकरण और सिंचाई व्यवस्था की भी जांच की गई।
आठ डिलीवरी पाइप बरामद
अभियान के दौरान पुलिस ने अवैध खेती में इस्तेमाल किए जा रहे आठ डिलीवरी पाइप भी बरामद किए, जिन्हें मौके पर ही नष्ट कर दिया गया। इन पाइपों का उपयोग अफीम की फसल की सिंचाई के लिए किया जा रहा था। इससे साफ होता है कि खेती सुनियोजित तरीके से की जा रही थी।
प्रशासन का मानना है कि जंगल और दूरदराज के क्षेत्रों को इसलिए चुना जाता है ताकि खेती पर किसी की नजर न पड़े। लेकिन लगातार मिल रही सूचनाओं के आधार पर पुलिस ऐसे मामलों पर सख्ती से नजर रखे हुए है।
शामिल लोगों की पहचान जारी
पुलिस ने बताया कि अवैध अफीम की खेती में शामिल लोगों की पहचान की जा रही है। चिन्हित होने के बाद संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मादक पदार्थों के अवैध कारोबार और खेती को किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
इस पूरे अभियान का नेतृत्व एसडीपीओ अजित कुमार बिमल ने किया। उनके साथ चौपारण थाना प्रभारी सरोज सिंह चौधरी, पुलिस बल के जवान और वन विभाग के कर्मचारी मौजूद रहे। संयुक्त टीम ने पूरे क्षेत्र की बारीकी से तलाशी ली ताकि कहीं और भी अवैध खेती न हो रही हो।
अवैध अफीम खेती: बढ़ती चिंता
झारखंड के कई जिलों में पिछले कुछ वर्षों में अवैध अफीम की खेती की घटनाएं सामने आती रही हैं। प्रशासन समय-समय पर ऐसे क्षेत्रों में अभियान चलाकर फसल को नष्ट करता है। अवैध अफीम की खेती न केवल कानून के खिलाफ है, बल्कि यह युवाओं को नशे की ओर धकेलने का एक बड़ा कारण भी बनती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी खेती पर रोक लगाने के लिए केवल कार्रवाई ही नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता अभियान भी जरूरी है। किसानों को वैकल्पिक फसलों की जानकारी और सरकारी योजनाओं का लाभ देकर इस समस्या को कम किया जा सकता है।
प्रशासन की सख्त चेतावनी
पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि भविष्य में भी इस तरह की अवैध गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जाएगी। जंगल और ग्रामीण इलाकों में नियमित गश्त और छापेमारी अभियान जारी रहेगा। यदि कोई व्यक्ति अवैध अफीम की खेती या तस्करी में शामिल पाया जाता है, तो उसके खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
इस कार्रवाई से यह संदेश साफ है कि हजारीबाग जिला प्रशासन अवैध मादक पदार्थों के खिलाफ पूरी तरह सतर्क है और किसी भी तरह की गैरकानूनी गतिविधि को बर्दाश्त नहीं करेगा।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि अवैध अफीम की खेती या मादक पदार्थों से जुड़ी किसी भी गतिविधि की सूचना तुरंत नजदीकी थाना को दें।

चौपारण में अवैध अफीम खेती












