हजारीबाग साइबर सुरक्षा जागरूकता कार्यशाला | सुरक्षित इंटरनेट दिवस 2026
हजारीबाग में सुरक्षित इंटरनेट दिवस के अवसर पर जिला प्रशासन द्वारा समाहरणालय सभाकक्ष में एक महत्वपूर्ण जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य शासकीय पदाधिकारियों और कर्मचारियों को इंटरनेट के सुरक्षित, जिम्मेदार और सतर्क उपयोग के प्रति जागरूक करना था, ताकि साइबर अपराधों से प्रभावी रूप से बचाव किया जा सके।
कार्यशाला के दौरान इंटरनेट से जुड़े कई गंभीर खतरों पर विस्तार से चर्चा की गई। इसमें साइबर फ्रॉड, डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगी, फर्जी कॉल और लिंक, ऑनलाइन धोखाधड़ी, साथ ही कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के सही उपयोग और डीपफेक तकनीक के बढ़ते दुरुपयोग जैसे विषय शामिल रहे। विशेषज्ञों ने बताया कि थोड़ी-सी लापरवाही बड़े नुकसान का कारण बन सकती है।
साइबर सुरक्षा में जागरूकता सबसे बड़ा हथियार : उपायुक्त
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपायुक्त शशि प्रकाश सिंह ने कहा कि डिजिटल तकनीक ने प्रशासनिक कार्यों को तेज, पारदर्शी और प्रभावी बनाया है। हालांकि, इसके साथ साइबर खतरे भी बढ़े हैं। ऐसे में शासकीय कर्मियों का सतर्क रहना बेहद जरूरी है।
उन्होंने कहा कि यदि सरकारी अधिकारी और कर्मचारी स्वयं जागरूक रहेंगे, तो वे न केवल अपनी व्यक्तिगत जानकारी को सुरक्षित रख पाएंगे, बल्कि कार्यालयों और आम जनता को भी साइबर अपराध से बचाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने सभी से संदिग्ध कॉल, मैसेज, ई-मेल और सोशल मीडिया लिंक से सावधान रहने की अपील की।
डिजिटल अरेस्ट के नाम पर कॉल पूरी तरह फर्जी : SDPO
कार्यशाला में अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी अमित आनंद ने साइबर अपराध के नए-नए तरीकों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर आने वाले कॉल पूरी तरह से फर्जी होते हैं।
साइबर अपराधी खुद को पुलिस, सीबीआई, ईडी या अन्य जांच एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं और उनसे पैसे की मांग करते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अब अपराधी डीपफेक तकनीक का भी इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे आवाज और वीडियो असली जैसे प्रतीत होते हैं। ऐसे मामलों में घबराने के बजाय तुरंत स्थानीय पुलिस या साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करना चाहिए।
सुरक्षित इंटरनेट उपयोग की दिलाई गई शपथ
कार्यशाला के अंत में उपस्थित सभी पदाधिकारियों और कर्मियों को सुरक्षित इंटरनेट उपयोग की शपथ दिलाई गई। सभी ने संकल्प लिया कि वे डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग पूरी सावधानी, जिम्मेदारी और जागरूकता के साथ करेंगे।
कार्यक्रम का संचालन जिला सूचना पदाधिकारी ने किया। इस अवसर पर प्रशिक्षु आईएसएस सहित जिले के विभिन्न विभागों के अधिकारी और कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
जागरूकता ही साइबर सुरक्षा की कुंजी
यह कार्यशाला इस बात का स्पष्ट संदेश देती है कि बदलते डिजिटल युग में साइबर सुरक्षा केवल तकनीक का नहीं, बल्कि जागरूकता का विषय है। यदि हर व्यक्ति सतर्क रहे और सही जानकारी रखे, तो साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।
साइबर क्राइम हेल्पलाइन (भारत सरकार) 1930 (24×7, पूरे भारत में मान्य)

हजारीबाग साइबर सुरक्षा जागरूकता कार्यशाला












