झारखंड की राजनीति में सद्भाव का संदेश: रघुवर दास की हेमंत सोरेन से मुलाकात
नई दिल्ली, 14 जुलाई 2025 – झारखंड की राजनीति में आज एक ऐसा दृश्य सामने आया जिसने समर्पण, सद्भाव और सम्मान की परंपरा को पुनः जीवंत कर दिया। ओडिशा के राज्यपाल और झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने आज नई दिल्ली में झारखंड के वर्तमान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात की। यह मुलाकात केवल एक राजनीतिक शिष्टाचार नहीं थी, बल्कि झारखंड के मूल राजनीतिक मूल्यों और संवेदनशीलता का प्रतीक बन गई।
इस दौरान रघुवर दास ने झारखंड आंदोलन के प्रणेता और राज्यसभा सांसद शिबू सोरेन (गुरुजी) के स्वास्थ्य की जानकारी ली। उन्होंने गुरुजी के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करते हुए कहा,
शिबू सोरेन जी केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि झारखंड की आत्मा हैं। उनके संघर्ष से हमें यह राज्य मिला है। मैं उनके शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करता हूँ।
जब सहयोग ने ली राजनीति की जगह
हेमंत सोरेन और रघुवर दास, भले ही अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराओं से आते हैं, लेकिन उनकी इस मुलाकात में जो आत्मीयता और सौहार्द दिखा, उसने यह साबित कर दिया कि लोकतंत्र का असली सौंदर्य संवाद और सहयोग में है।
उन्होंने झारखंड के विकास, युवाओं के भविष्य और सामाजिक समरसता को लेकर साझा प्रतिबद्धता जताई।
झारखंड की राजनीति को मिला नया मार्ग
यह मुलाकात सिर्फ एक व्यक्तिगत सौजन्य नहीं थी, बल्कि यह झारखंड की राजनीतिक संस्कृति में पुनरुत्थान का संकेत थी। एक ऐसा समाज जहाँ विरोध का मतलब विभाजन नहीं होता, और जहाँ राजनीति का उद्देश्य सिर्फ सत्ता नहीं, बल्कि सेवा होता है।
राज्य और देश भर से नेताओँ का तांता
गुरुजी की तबीयत की खबर सामने आने के बाद राज्य और केंद्र सरकार के कई नेता उनके स्वास्थ्य का हाल जानने अस्पताल पहुँचे।
- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी उनकी सेहत पर चिंता जताई और अस्पताल में जाकर उनके परिजनों से मुलाकात की।
- इसके अलावा कई राज्य मंत्री, सांसद और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने भी फोन या व्यक्तिगत रूप से संपर्क किया।
बाबूलाल मरांडी का अस्पताल दौरा
बुधवार, 10 जुलाई 2025 को झारखंड भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी भी दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल पहुँचे। उन्होंने ICU में भर्ती गुरुजी के स्वास्थ्य की जानकारी ली और परिवारजनों से बातचीत की।
क्या कहती है राजनीतिक संस्कृति?
इस घटना ने यह साबित कर दिया है कि राजनीति में जब मानवीयता हावी होती है, तब एकता और सद्भाव का संदेश समाज में गूंजता है।
बाबूलाल मरांडी का यह कदम झारखंड की राजनीति के लिए एक मिसाल बन सकता है — जहाँ सत्ता से अधिक संबंधों और संवेदनाओं को अहमियत दी जाए।
निष्कर्ष:-
रघुवर दास और हेमंत सोरेन की यह मुलाकात आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणा है — कि राजनीति में भी इंसानियत, संवाद और सहयोग को स्थान दिया जा सकता है। यह घटना झारखंड और पूरे देश के लिए एक राजनीतिक आदर्श बनकर उभरी है।